मंगलवार 16 जून 2026 - 20:06
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने देश भर में अमानवीय और गैर-कानूनी कार्रवाइयों को रोकने की मांग की

हौज़ा / जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के सीनियर रहनुमाओं ने यहाँ अपने मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने विध्वंसक कार्रवाई, हाल ही में घोषित अमेरिका-ईरान शांति समझौते, राज्यसभा चुनावों की निष्पक्षता और पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की स्थिति को लेकर चिंताएं जाहिर कीं हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,नई दिल्ली, 16 जून 2026,जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के सीनियर रहनुमाओं ने यहाँ अपने मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने विध्वंसक कार्रवाई, हाल ही में घोषित अमेरिका-ईरान शांति समझौते, राज्यसभा चुनावों की निष्पक्षता और पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की स्थिति को लेकर चिंताएं जाहिर कीं हैं।

मीडिया से बात करते हुए जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने दिल्ली में चल रहे विध्वंसक अभियानों की कड़ी निंदा की क्योंकि ये बिना उचित कानूनी प्रक्रिया और पुनर्वास की सही योजनाओं के चलाए जा रहे हैं। उन्होंने ऐसी कार्रवाइयों को बेहद अमानवीय और मौलिक अधिकारों व मानवीय गरिमा का उल्लंघन बताया।

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने देश भर में अमानवीय और गैर-कानूनी कार्रवाइयों को रोकने की मांग की

मलिक मोतसिम खान ने कहा,पिछले कुछ हफ्तों में, दिल्ली, बांद्रा, फ़रीदाबाद, वीरमगाम (गुजरात), गोरेगांव (महाराष्ट्र), वाराणसी, संभल, जयपुर, भयंदर, पीसीएमसी, इटावा आदि में तोड़फोड़ अभियान चलाया गया। पिंपरी चिंचवड़ में अधिकारियों ने कई धार्मिक ढांचों को नोटिस जारी किए और देर रात चलाए गए एक ऑपरेशन के दौरान उनमें से कईओं को गिरा दिया।

सूरत के नासिर नगर में तीन दिनों में 106 घर गिरा दिए गए और जयपुर में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत नूरानी मस्जिद को गिरा दिया गया।

उन्होंने आगे कहा,कई प्रभावित परिवार बिना उचित आश्रय के हैं और उनके पुनर्वास को लेकर भी कोई स्पष्टता नहीं है। भीषण गर्मी के दौरान विध्वंसक कार्रवाई से पहले ही मुश्किलें पैदा हो गई हैं और मॉनसून से हालात और बिगड़ने की आशंका है। सुप्रीम कोर्ट ने ज़ोर दिया है कि उचित पुनर्वास के बिना लोगों को बेदखल नहीं किया जाना चाहिए।उन्होंने मांग की कि अधिकारी तुरंत विध्वंसक कार्रवाई रोकें और देश के हर नागरिक के लिए सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करें।

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने देश भर में अमानवीय और गैर-कानूनी कार्रवाइयों को रोकने की मांग की

यूएस-ईरान शांति समझौते पर जमाअत के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित शांति समझौते का स्वागत करती है और आशा व्यक्त करती है कि सभी सहमत प्रावधानों को संबंधित हितधारकों द्वारा अक्षरशः लागू किया जाएगा।

दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को देखते हुए, यह समझौता क्षेत्र में टकराव कम करने और स्थिरता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आगे कहा, "हमें यह भी उम्मीद है कि मध्यस्थ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह सुनिश्चित करेंगे कि समझौते का उल्लंघन न हो।किसी भी उल्लंघन के मामले में ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ निष्पक्ष और सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे उनकी राजनीतिक, सैन्य या आर्थिक ताक़त कुछ भी हो।

ताज़ा घटनाक्रम से आर्थिक दबाव कम होने और बढ़ती कीमतों, बेरोज़गारी और आर्थिक तनाव से प्रभावित आम लोगों को कुछ राहत मिलने की संभावना है। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद को उम्मीद है कि भारत सरकार शांति और बातचीत को बढ़ावा देने में ज़्यादा सक्रिय भूमिका निभाएगी।

साथ ही, हम ईरान के लोगों के साथ एकजुटता ज़ाहिर करते हैं और उनकी हिम्मत की तारीफ़ करते हैं।यह भी ज़रूरी है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय जारी अन्याय को नज़रअंदाज़ न करे, खासकर गाज़ा और फ़िलिस्तीन में युद्ध अपराधों और मानवीय उल्लंघनों से जुड़े मुद्दों को।

राज्यसभा चुनावों के मुद्दे पर प्रोफ़ेसर सलीम इंजीनियर ने कहा, "हाल के रुझानों ने चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर चिंताजनक सवाल खड़े किए हैं। हॉर्स ट्रेडिंग, पैसे के दम पर प्रभाव, विधायकों को डराने-धमकाने और क्रॉस-वोटिंग के आरोप अब आम बात हो गई है।

उन्होंने आगे कहा,मनमाने फैसलों, चुनिंदा जांच और नॉमिनेशन में पारदर्शिता की कमी की खबरों ने संस्थागत निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।विपक्ष के एक राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन हाल ही में खारिज किया गयाजो खबरों के अनुसार इसके इतिहास में पहली बार हुआ है। यह प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगाता है और एक खतरनाक मिसाल कायम करता है।

पश्चिम बंगाल के हालात पर बात करते हुए APCR के नेशनल सेक्रेटरी नदीम खान ने कहा, "
ज़बरदस्ती राजनीतिक लॉयल्टी बदलने, विपक्षी पार्टियों को तोड़ने और राजनीतिक विरोधियों के ख़िलाफ़ सड़क पर हिंसा की कई रिपोर्टें आ रही हैं, जिससे डर और ज़बरदस्ती का माहौल बन रहा है। उन्होंने आगे कहा,तोपसिया जैसे इलाकों में हालात खास तौर पर चिंताजनक हैं, जहां विध्वंस के नोटिस की वजह से हजारों लोगों के विस्थापित होने का खतरा पैदा हो गया है।

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने देश भर में अमानवीय और गैर-कानूनी कार्रवाइयों को रोकने की मांग की

इस तरह की कार्रवाई निष्पक्षता और उचित प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा करती है। अगर कोई गैर-कानूनी निर्माण है, तो उस पर कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन ऐसी किसी भी कार्रवाई में तय कानूनी प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

पश्चिम बंगाल में हो रही घटनाओं जिनमें तोड़-फोड़ की कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक दबाव और डराने-धमकाने की खबरें भी शामिल है एक ऐसे माहौल के बनने का संकेत मिलता है जो लोकतांत्रिक कामकाज के लिए तेज़ी से खतरनाक होता जा रहा है।

नेताओं ने सामूहिक रूप से नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे इन मुद्दों पर ध्यान दें और प्रभावित लोगों के साथ एकजुटता दिखाएं। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने फिर से कहा कि देश के संवैधानिक और लोकतांत्रिक ढांचे को बनाए रखने के लिए सभी नागरिकों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा की रक्षा करना बुनियादी बात है।

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha